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गुरुवार, 13 सितंबर 2012

जिंदगी  दर्द के सहरा से  गुजरती  रही तनहा-तनहा ;
साँस  दर साँस उम्र घटती रही यूँ ही  तनहा-तनहा :
हंस  कर गुजर जाती तो अच्छा होता ,ग़म  तो ये है ;
कि  हर रत शबनम तरबतर करती रही तनहा-तनहा :
मैंने  काटी  है सजा किसी और के गुनाहों की ,तब भी गिला नहीं ;
 जो मिला हंस कर लिया ,माना कि ,
समय कम था जिंदगी के पास  जितना था हंस कर गुजर गया तनहा-तनहा :
हर  तस्वीर बिगड़ती  गई   सुखनवर बनूँ इस कोशिश में ,
तमाम उम्र  इक ख़ुशी के इन्जार में ,,
अश्क तमाम दामन में समेटे खत्म हो गई तनहा-तनहा 

13 टिप्‍पणियां:

डा. श्याम गुप्त ने कहा…

--बहुत सुन्दर गज़ल व भाव हैं, बधाई...
--- यदि इसे क्रमवार इस तरह रखा जाय तो और सुन्दर लगेगी....

जिंदगी दर्द के सहरा से गुजरती रही तनहा-तनहा ;
साँस दर साँस उम्र घटती रही यूँ ही तनहा-तनहा :

हंस कर गुजर जाती तो अच्छा था,गम है मगर;
हर रात शबनम तरबतर करती रही तनहा-तनहा :

मैंने काटी है सजा किसी और के गुनाहों की ,
गिला नहीं जो मिला लिया हंसकर तनहा-तनहा :

माना कि,समय कम था जिंदगी के पास लेकिन,
जितना था हंस कर गुजारा है तनहा-तनहा :

हर तस्वीर बिगड़ती गई इक ख़ुशी के इन्तजार में,
अश्क दामन में समेटे, उम्र तमाम हुई तनहा-तनहा :


ऋता शेखर मधु ने कहा…

हंस कर गुजर जाती तो अच्छा था,गम है मगर;
हर रात शबनम तरबतर करती रही तनहा-तनहा

बहुत खूब...पुनः आपके ब्लॉग पर आने की खुशी मिली तनहा तन्हा!!

kase kahun?by kavita verma ने कहा…

bahut khoob..

मन्टू कुमार ने कहा…

बहुत खूब |

आनन्द विक्रम त्रिपाठी ने कहा…

सुन्दर रचना । स्वागत है ।

मनीष सिंह निराला ने कहा…

बहुत सुन्दर !

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

डॉ.श्याम गुप्त के सुझाव को समर्थन.सुंदर भावपूर्ण रचना.

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

कृपया संगीत ब्लॉग से वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें.टिप्पणी नहीं हो पा रही है.

Rajesh Kumari ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति संगीता जी

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

bahut hi sundar sangeeta ji ....abhar.

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

bahut hi sundar sangeeta ji ....abhar.

Naveen Mani Tripathi ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
Suman ने कहा…

माना कि,समय कम था जिंदगी के पास लेकिन,
जितना था हंस कर गुजारा है तनहा-तनहा :
sundar ....

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