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बुधवार, 23 मई 2012

मेरा मन

जीवन में उत्सवों के रंग भरता ;मेरे जीवंत होने को प्रमाणित करता ,
थमा देता है साहस की लाठी मेरे हाथ ;
ये मेरा मन मुझे कभी हारने नहीं देता ..........
गुजारी हुई यादों की तस्वीरें ,आने वाले कल के  सपने,काल
समय सदा ही उकेरता रहता है मेरे अन्तर्मन में ;
ये मेरा मन मुझे अभी मायूस नहीं होने देता .......................
जीवन के आरोहों-अवरोहों में ,खो जाते हैं विचार जिन्दगी के शोर में ;
समेट लेता है मुझे अपने आगोश में , ये मन मेरा मुझे कभी एकाकी नहीं होने देता.....................
यादों के गलियारों से गुजरते हुए ,गुजरे हुए हादसों को अध्याय सा सहेजते हुए ;
अनुभवों की नींव से फिर निर्माण करता ;
मेरा मन मुझे सहलाता और संवारता रहता है....................
नियति के सधे हुए  क्रम में ,निर्माण और निर्वाण के काल क्रम में ,
जब मिटने लगतीं हैं पानी में लिखी इबारतें,
तब हौसला देता मेरा ये मन मुझे कभी बिखरने नहीं देता ..................
जीवन में उत्सवों के रंग भरता मेरा ये मन मेरे जीवंत होने को प्रमाणित करता,
मेरा मन मुझे कभी हरने नहीं देता ....................
                                                     सादर 

21 टिप्‍पणियां:

ऋता शेखर मधु ने कहा…

सकारात्मक सोच से ओत प्रोत बहुत सुंदर लगी कविता!!

R.Ramakrishnan ने कहा…

Bahut sundar bhavana !

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...संगीता जी..

sangita ने कहा…

Thanx

sangita ने कहा…

Thanx

संध्या शर्मा ने कहा…

मन के हारे हार है
मन के जीते जीत
सुन्दर सकारात्मक सोच से ओत प्रोत रचना के लिए आभार...

रश्मि प्रभा... ने कहा…

यादों के गलियारों से गुजरते हुए ,गुजरे हुए हादसों को अध्याय सा सहेजते हुए ;
अनुभवों की नींव से फिर निर्माण करता ;
मेरा मन मुझे सहलाता और संवारता रहता है... जबरदस्त भाव

सदा ने कहा…

अनुपम भाव संयोजित करती उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति ..

Anupama Tripathi ने कहा…

सबसे पहले ब्लोग वपस मिल जाने की ढेरों बधई .....
आल तो बिल्कुल मन से निकली है आपकी रचना ....!!
बहुत सुंदर ....!

रविकर फैजाबादी ने कहा…

मनहर यह रचना लगी, इच्छा बोध विचार |
सहे वेदना मन सभी, बढ़िया ये उदगार |

बढ़िया ये उदगार, बोझ मन भर मन धरते |
यह जीवन संसार, कभी न पार उतरते |

उत्सव का एहसास, कराये हरदम रविकर |
मन ही सच्चा दोस्त, भरोसा मन का मनहर ||

dheerendra ने कहा…

बहुत सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति,बेहतरीन रचना,,,,,संगीता जी ,....

MY RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि,,,,,सुनहरा कल,,,,,

lamhe ने कहा…

साहस की मिसाल
है ये रचना

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जीवन के आरोहों-अवरोहों में ,खो जाते हैं विचार जिन्दगी के शोर में ;
समेट लेता है मुझे अपने आगोश में , ये मन मेरा मुझे कभी एकाकी नहीं होने देता.............

मन ही होता है जो उभारता है किसी भी निराशा के पल में ... दरिद संकप्ल मन कों जीवित रखता है .. आशा भरी सुन्दर रचना ...

रविकर फैजाबादी ने कहा…

मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |

आओ धक्का मार के, महंगा है पेट्रोल ||

--

शुक्रवारीय चर्चा मंच

Rajesh Kumari ने कहा…

बहुत सुन्दर सकारात्मक सोच लिए अप्रतिम रचना

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

सकारात्मकता ही उत्साह का खजाना है....
सुंदर रचना...
सादर।

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

kahte hain na man k hare baar hai...man k jeete jeet...bas man sambhal leta hai to fir koi pareshani pareshan nahi kar sakti.

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

बेहतरीन रचना...सुंदर प्रस्तुति..आभार

पढ़े इस लिक पर
दूसरा ब्रम्हाजी मंदिर आसोतरा में जिला बाडमेर राजस्थान में बना हुआ है!
....

सुखदरशन सेखों (दरशन दरवेश) ने कहा…

आपकी ऊंची सोच को सलाम |

Sadhana Vaid ने कहा…

बहुत सुन्दर !

Pankaj Kumar Sah ने कहा…

मैंने आपका ब्लॉग देखा बढ़िया लगा बस इसी तरह रचते रहें और कभी समय मिले तो मेरे घर भी पधारें स्वागत है पता है ...http://pankajkrsah.blogspot.com

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