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मंगलवार, 12 मार्च 2013

जिंदगी भी बाकी न रही

वो शोखियों में लिपटी मुस्कान न रही ,
तबस्सुम में भी दिलकशी बाकी न रही .............
सीने से लगाये हूँ उम्मीदों की तलाश ,
कि खामोशियों में भी अब बैचेनी न रही ;;;;;;;;;;;;;
माना की जिंदगी ही तगाफुल ही रही मुझसे हमेशा ,,
कंधों पर सजाती रही है बारे-मसाइब (मुसीबते) हमेशा
 क्यूँ खोजती हूँ नए तर्ज के नए  गीत हमेशा ;;;;;;;;;
जब मेरी जीस्त के मुकद्दर में ही रोशनी न रही ::::::::::::::::;
अब भी जमाने की तल्खियों ने पुकारा है मुझे ,
जलती हुई  राहों पर सिसकती हुई रूहों ने पुकारा है मुझे ,,,,,,,
जाता हुआ वक्त भी दिखाई देता है ,कुछ साए भी नजर आते हैं ;;;;;;;;;
उम्र भर रेंगते रहने की सजा सुनाई है मुझे ;;;;;;;;;;;;;
कुछ भी तो न रहा अब जिंदगी भी बाकी न रही::::::::::::::::::::
वो शोखियों में लिपटी मुस्कान न रही 

4 टिप्‍पणियां:

avanti singh ने कहा…

बहुत उम्दा .....

shikha kaushik ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति आभार
हम हिंदी चिट्ठाकार हैं
भारतीय नारी

संध्या शर्मा ने कहा…

बहुत सारी रचनाएँ पढ़ी आज… हरेक अपने आप में ख़ास है, जवाब नहीं आपके लेखन का… लाजवाब … शुभकामनायें संगीता जी

Tanuj Vyas ने कहा…

काफी अच्छी कविताएँ लिखते हो.... Http://tanuj-linesfromheart.blogspot.in/

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