दर्द कभी बोला या बताया नहीं जाता......
वह तो तनहा ही सहा जाता है..................
एहसासों के साथ सभी अकेले होते हैं.
इंसान को ढाला जाता है परवरिश के सांचे में,
एहसास ढल जाता है अनुभवों के सांचे में .
सुख हो या दुःख सांझा हो सकता है पर एक नहीं होता,
एहसास सभी को होता है पर साझा नहीं हो सकता
दुःख बांटा जाता है नाकामियों पर अफ़सोस कर.
सुख बांटा जाता है हौसलों के गीत गाकर.
एहसासों को शब्दों का जामा नहीं पहनाया जा सकता ,
दुःख बांटा जाता है नाकामियों पर अफ़सोस कर.
सुख बांटा जाता है हौसलों के गीत गाकर.
एहसासों को शब्दों का जामा नहीं पहनाया जा सकता ,
एहसास मूक होता है अपना होता है बांटा नहीं जा सकता
इस जंगल में सब तनहा होते हैं सब अकेले ही होते हैं..........
इस जंगल में सब तनहा होते हैं सब अकेले ही होते हैं..........
