दिल को अब भी सुकून है कि जिंदगी सिर्फ ज़र-जमीं का पैमाना नहीं, यहाँ दर्द भी हैं एहसास भी हैं शौक़ भी हैं रवायतें भी हैं; यह सिर्फ बेतरतीब सी साँसों का खजाना ही नहीं है,
ये पंक्तियाँ बहुत ही खुबसूरत हैं.....बहुत पसंद आयीं।
संगीता जी, आप को सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया,"राजपुरोहित समाज" आज का आगरा और एक्टिवे लाइफ,एक ब्लॉग सबका ब्लॉग परिवार की तरफ से सभी को भगवन महावीर जयंती, भगवन हनुमान जयंती और गुड फ्राइडे के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ॥ आपका सवाई सिंह{आगरा }
थकन से चूर रेंगती हुई जिंदगी का बोझ उठाया नहीं जाता , दहलीज पर काई की तरह जम गये हैं वो,नई इबारत लिक्खें भी तो कहाँ अब, ...sach kaha aapne.. bahut badiya prastuti..
दिल को अब भी सुकून है कि जिंदगी सिर्फ ज़र-जमीं का पैमाना नहीं, यहाँ दर्द भी हैं एहसास भी हैं शौक़ भी हैं रवायतें भी हैं; यह सिर्फ बेतरतीब सी साँसों का खजाना ही नहीं है,
बहुत प्रभावशाली रचना है संगीता ! आपका लेखन उत्तरोत्तर निखरता जा रहा है ! बधाई एवं शुभकामनायें !
32 टिप्पणियां:
बहुत सुन्दर....
एक सार्थक रचना....
सादर.
बेहतरीन!
सादर
चलो फिर कोई ख्व़ाब बुने नए कल के वास्ते
पथरीली राहें निकल गई,शायद समतल हों नए रास्ते ||
शुभकामनाएँ!
बहुत बढ़िया रचना,संगीता जी,...
सुंदर अभिव्यक्ति,बेहतरीन पोस्ट,....
MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: मै तेरा घर बसाने आई हूँ...
हर तरफ बिखरी हुईं हैं अश्कों में भीगी उम्मीदें ,थके हुए हौसले ,
कि जी खोल कर अब खुद पर हसाँ भी नहीं जाता ; .....सच कहा
बहुत अच्छा लगा हमे!
Bahut Hi Umda Bahv.....
उम्दा लेखन्……
aap sbhi ka dhanyava mere blog par aakar mere utsaah vardhan hetu
क्योंकि ये ख्व़ाब ही तो असास हैं
सुंदर नज़्म...
हार्दिक बधाई।
दिल को अब भी सुकून है कि जिंदगी सिर्फ ज़र-जमीं का पैमाना नहीं,
यहाँ दर्द भी हैं एहसास भी हैं शौक़ भी हैं रवायतें भी हैं;
यह सिर्फ बेतरतीब सी साँसों का खजाना ही नहीं है,
ये पंक्तियाँ बहुत ही खुबसूरत हैं.....बहुत पसंद आयीं।
मुकम्मल जहां की तलाश दिल में है तो वह मौजूद भी होना चाहिए .
इसी का नाम जन्नत है या स्वर्ग है.
See
http://allindiabloggersassociation.blogspot.in/2012/04/blog-post_9049.html#comments
गहन अभिव्यक्ति ...
बहुत अच्छी लगी ...
शुभकामनायें ...!
सुंदर प्रस्तुति!
जीवन की इस आपाधापी में हर कोई खुद में ही व्यस्त हैं ....आभार
दिल को अब भी सुकून है कि जिंदगी सिर्फ ज़र-जमीं का पैमाना नहीं,
यहाँ दर्द भी हैं एहसास भी हैं शौक़ भी हैं रवायतें भी हैं;
....बहुत सुन्दर पंक्तियां...दर्द के बीच में भी आशा की एक किरण ....बहुत सुन्दर भावमयी प्रस्तुति..
हर किसी को मुकम्मल ज़िन्दगी मिलती नहीं
कहीं पर पंख हैं तो परवाज़ कहीं मिलती नहीं
...बहुत सच कहा आपने
चलो फिर कोई ख्व़ाब बुने नए कल के वास्ते क्योंकि ये ख्व़ाब ही तो असास (नींव)हैं तहजीबे जिंदगी के ,बहुत प्रभावशाली लिखा है आपने
खूबसूरत शब्दों से सजी नज़्म ....
संगीता जी,
बहुत बढ़िया रचना
संगीता जी,
आप को सुगना फाऊंडेशन मेघलासिया,"राजपुरोहित समाज" आज का आगरा और एक्टिवे लाइफ,एक ब्लॉग सबका ब्लॉग परिवार की तरफ से सभी को भगवन महावीर जयंती, भगवन हनुमान जयंती और गुड फ्राइडे के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ॥
आपका
सवाई सिंह{आगरा }
ख्वाब देखना तो फिर भी जारी रहना चाहिए ... थकान है .. बदलते मूल्य हैं पर आशा की किरण भी तो इन्ही के बीच से आणि है ...
थकन से चूर रेंगती हुई जिंदगी का बोझ उठाया नहीं जाता ,
दहलीज पर काई की तरह जम गये हैं वो,नई इबारत लिक्खें भी तो कहाँ अब,
...sach kaha aapne..
bahut badiya prastuti..
sarthak post .aabhar
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Wah khoob. Bahut sundar pharmaish.
सुन्दर प्रस्तुति, सुन्दर भावाभिव्यक्ति, बधाई.
सार्थक पोस्ट, आभार.
bilkul sahi ...........
खूबसूरत भाव एवं सुन्दर अभिव्यक्ति....
बहुत खुबसूरत रचना.
एक शेर याद आता है
'कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कभी जमी तो कभी आसमान नहीं मिलता '
सुन्दर अभिव्यक्ति....
दिल को अब भी सुकून है कि जिंदगी सिर्फ ज़र-जमीं का पैमाना नहीं,
यहाँ दर्द भी हैं एहसास भी हैं शौक़ भी हैं रवायतें भी हैं;
यह सिर्फ बेतरतीब सी साँसों का खजाना ही नहीं है,
बहुत प्रभावशाली रचना है संगीता ! आपका लेखन उत्तरोत्तर निखरता जा रहा है ! बधाई एवं शुभकामनायें !
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